जय शिव शंकर,,जय श्री राम
श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व हम सभी सनातनी मनाते है।इस पर्व पर प्रमुख शिव मंदिरों में नाग देवता के दर्शन और पूजन करते है मुख्य रूप से इस काल सर्प योग का पूजन का विशेष महत्व होता है,,,
नाग पंचमी के दिन श्रदा भक्ति से नाग देवता का जो भी पूजन करते है उन्हें सर्प का भय नही होता जन्मपत्रिका में राहु केतू के मध्य सभी ग्रह आते है तो कल सर्प योग बनता है ,ओर अगर एक ग्रह बाहर हो तो आंशिक काल सर्प योग बनता है,,,
पूजन विधि,,,,
नाग पंचमी पर सुबह उठकर स्नान आदि करने के उपरांत सबसे पहले भगवान शंकर का पूजन और ध्यान करे इसके बाद नाग नागिन के जोड़े की प्रतिमा जो सोने ,चांदी,ताँबे या लोहे के होते है उनका पूजन कर यह ध्यान करे,,,
अनंतं वासुकी शेष पद्मनाभम च कम्बलं,
शंखपाल धृतराष्ट्र तकछकम कालियं तथा
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मानं
सायंकाले पठे नित्यं प्रातः काले विशेषतः
तस्मे विषभयम नास्ति सर्वत्र विजयी भवैत।।
इसके उपरांत पूजा व संकल्प के साथ नाग नागिन के जोड़े का स्नान दूध दही पंचामृत गंगाजल शहद से स्नान कराएं फिर गन्ध चावल धूप दीप से पूजन कर फल और नैवेद्य चढाये ओर फिर अपने ग्रहों का ध्यान कर राहु केतु का पूजन भी करे,,
उसके उपरांत माता मनसा का पूजन स्मरण करें और भोग लगाएं,,,
ओर ध्यान करे,,,,,
सर्वेनागा प्रियनतां में येकेचित पृथिवी तले,
ये हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि सन्थिता,
ये नदिषु महा नागा ये सरस्वती गामिनी,
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वे नमः।।
ध्यानके बाद नाग गायत्री का जाप करे,,
ॐ नागकुलाय विध्महे
विषदन्ताय धीमहि
तन्नो सर्प प्रचोदयात,,,,
यह अल्प पूजन करे विस्तृत अपने गुरु ब्राह्मण के द्वारा यह पूजन करे जिससे सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी,,,,,
जय शिव शंकर।।
आचार्य अनुरोध
उत्तराखण्ड

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